सुविधानुसार किया जाने लगा है ‘मां’ शब्द का इस्तेमाल

By Nabeela Shagufi

हम भारतीय मां शब्द को लेकर बड़े भावुक होते हैं। ये भावनाएं हमारे दिमाग में ऐसे ही घर नहीं कर गईं इसमें निरूपा राॅय और रीमा लागू का भी अहम किरदार है। जिन्हें पर्दे पर देखते ही हमारे मन में भी भावनाओं के बादल उमड़-घुमड़ करने लग जाते थे।
इधर मां शब्द को लेकर रीमा लागू से इतर भी कुछ भावनाएं जुड़ गई हैं, पर इन भावनाओं का स्वरूप बदल गया है जैसे एक नौजवान पूरे श्रद्धा के साथ मंदिर में ‘जय माता दी’ की जय जयकार कर रहा हो बगल में जरा सी टक्कर क्या लगी ‘तेरे मां की’ पर उतर आता है। इस तरह से मां शब्द का इस्तेमाल श्रद्धा के लिए, दिल का भड़ास निकालने के लिए और अब तो राष्ट्रीयता जानने के लिए भी किया जाने लगा है।

अभी ट्रेंड में चल रहे भारत माता पर मनमोहन सिंह ने कहा है कि अब ‘भारत माता की जय’ का दुरूपयोग किया जाने लगा है। इसके जवाब में हमारे प्रधानमंत्री ने भी कहा कि कुछ लोगों को ‘भारत माता की जय’ कहने से भी बू आने लगी है। मुद्दा ये नहीं है कि कौन भारत माता की जय कह रहा है या नहीं बल्कि मुद्दा ये है कि चुनिंदा लोग ये क्यों तय करेंगे कि हम अपनी सरजमीं को किस नाम से पुकारें ? आपत्ति तब जताई जानी चाहिए जब कोई भारत के खिलाफ नारे लगाए, या ‘भारत माता की जय’ कह कर भी किसी के साथ हिंसा करे।

जब दिल्ली हिंसा की लपटें कम नहीं हुईं, मरने वालों की तादाद हर दिन बढ़ रही उस वक्त प्रधानमंत्री संसदीय दलों की बैठक में मनमोहन सिंह पर कटाक्ष करते हुए कह रहे थे कि वे देशहित में काम करते हैं। देशहित का पर्याय सिर्फ भारत माता की जय कहना नहीं है। देशहित तब होता जब प्रधानमंत्री राजधानी में चल रहे दंगों पर काबू कर पाते। जिनके साथ हिंसा होती है वो तो प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं। लेकिन इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। दंगे कभी राष्ट्रहित में नहीं हो सकते।

भाजपा द्वारा बनाए गए देशभक्ति के पैमाने गंभीर रूप धारण कर रहे हैं इसका ताजा उदाहरण दिल्ली दंगों में घायलों को पुलिस कर्मियों द्वारा राष्ट्रगान गाने को मजबूर करना है। पर इन पुलिस कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
जब एक घर में बहुत सारे भाई-बहन होते हैं तो उनके अपनी माँ से प्यार जताने के तरीके भी अलग-अलग होते हैं। उनमें से कोई एक तय नहीं करता कि कौन अपनी माँ को ज्यादा प्यार करता है। कोई ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ कहे या ‘भारत माता की जय’ इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। बल्कि इसे देशभक्ति का पैमाना बनाने से आपत्ति जताई जानी चाहिए।

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