शिव विहार की डरावनी रात और पड़ोसियों का दंगों में क्या हाथ रहा… चलिए जानते हैं.

By Meer Faisal

कुछ दिन पहले हमलोग मुस्तफाबाद पहुंचे थे. हमलोग अंदर के तरफ जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड के पास रोक दी. जो लोग शिव विहार छोड़कर मुस्तफाबाद और सीलमपुर के तरफ जा चुके हैं उनमे से कुछ लोगों से हमने बात की. एक महिला ने जो बताया वो काफी डरावना था. क्योंकि ऐसा कहा गया है, प्रत्येक सुख दुख में पड़ोसी ही काम आता है. लेकिन जब एक पड़ोसी ही दंगाइयो का साथ देकर दंगाई बन जाए फिर आप उस पड़ोसी से क्या उम्मीद कर सकते हैं।

एक पीड़ित महिला ने हमलोग को बताया “जब दोपहर में माहौल थोड़ा गड़बड़ हो रहा था तो पड़ोसियों ने कहा, कहीं जाने की जरूरत नहीं है, आप अंदर रहिये आपको कुछ नहीं होगा. जैसे ही शाम हुई बाहर से दरवाज़े को पड़ोसियों ने ही बंद कर दिया और दंगाइयो को बुला कर बताया कि ये मुस्लिम का घर है और कई घरों को पहचान करने में पड़ोसी लोग शामिल थे, जो बता रहे थे कि ये मुसलमान का घर है बाहर से भी कई लोग बुलाये गए थे, कैसे भी करके हम खुदको अंदर छिपा लिये बाकी कुछ लोगों को निकाल कर मारा तो कुछ लोग जो भागने में सफल रहे उनके घर का सामान निकाल कर जलाया और लूटा”.

औरतों के सेक्सुअल हैरेशमेंट के मामले भी देखने को मिल रहा है। मैं बहुत कुछ लिखने से बच रहा हूं, इसके पीछे कुछ कारण है. खैर जो बातें मैं 2दिन पहले बता चुका हूँ वो सारी बातें आज पढ़ने को मिल रहा शिव विहार की हक़ीक़त जानने के बाद आपका रूह काँपना लाजिम है.

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