इस लड़ाई को ‘सिस्टम बनाम सिटीजन’ ही रहने दें

by Nabeela Shagufi

इधर अनुराग ठाकुर गोली मारने को कहते हैं उधर एक नाबालिग गोली मारने पहुँच जाता है। कपिल मिश्रा खुलेआम पुलिस को धमकियां दे रहे हैं, दंगे कराने की धमकियां देते हैं और दंगे हो जाते हैं। ये पहली बार नहीं है जब सीएए के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई हो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टोपी और लुंगी पहन कर एक भाजपा कार्यकर्त्ता और कुछ युवकों द्वारा पुलिस पर हमले कराए गए, हिंदूओं के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है इस तरह की वीडियोज वायरल की गईं बावजूद इसके माहौल हिंदू बनाम मुसलमान नहीं बन पाया लेकिन अफसोस करने की बात ये है कि कपिल मिश्रा जैसे लोग लगातार कोशिशों से अपने साजिश में कामयाब हो रहे हैं माहौल उनके मुताबिक तैयार हो रहा है। उन्हें अपने खिलाफ चल रहे माहौल को कुचलना है जिसके लिए वो बहुसंख्यक समुदाय को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें नहीं मतलब कि मरने वाला कोई ‘रतन लाल’ है या ‘फुरकान’। उन्हें अपनी सत्ता से मतलब है और बहुसंख्यक समुदाय के सहयोग के बिना ये मुमकिन नहीं है। पत्थर और गोलियां खाने वाले कपिल मिश्रा नहीं थे, उनकी गाड़ियां और दुकानें नहीं जलीं। इन दंगों का शिकार सिर्फ आम जनता होती है जिनकी जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान है पर राजनीति ने उन्हें धर्म के चक्रव्यूह में उलझाया दिया है। चाहे हिंदू हों या मुसलमान ये सत्ताधारी पार्टी का केवल मोहरा भर हैं।

जो लोग सड़कों पर खड़े हैं वो किसी समुदाय के खिलाफ़ नहीं हैं। उनकी लड़ाई हिंदुस्तान को बचाने के लिए है, संविधान को बचाने के लिए है। वरना स्वरा भास्कर, रामचंद्र गुहा, अनुराग कश्यप जैसे लोगों के पास कोई मजबूरी नहीं है जनता के साथ खड़े होने की। इनकी लड़ाई किसी पाकिस्तानी मुस्लिम को नागरिकता दिलाने के लिए नहीं है क्योंकि एक पाकिस्तानी मुस्लिम जो वहां अल्पसंख्यक नहीं है और अगर उसे वहां किसी तरह के प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ता तो अमूमन वह किसी ऐसे देश की नागरिकता नहीं लेना चाहेगा जहां उसे अल्पसंख्यक का दर्जा मिले। उनकी लड़ाई उस बड़ी आबादी के लिए है जिन्हें दो वक्त की रोटी मयस्सर नहीं है, जिनके रहने के लिए छत नहीं है उनके पास सालों पुराने दस्तावेज होना नामुमकिन है।
बेहतर होगा कि इस लड़ाई को ‘हिंदू बनाम मुसलमान’ बनाने की बजाए ‘सिस्टम बनाम सिटीजन’ ही रहने दें। और आपस में लड़ने की बजाए सिस्टम से सवाल करना सीखें।

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